“मैडम जी..कहाँ थी आप?”

“मैडम जी..कहाँ थी आप?”
***राजीव तनेजा***
“अब क्या मुँह लेकर अपना हाल ब्याँ करे ये राजीव?”
“मैँ खुद ही तो तारीफों के पुल बाँधा करता था उनके”…
“हाँ!..उन्हीं के”….
“जिनकी वजह से तो आज मेरा ये हाल है”…
“आज अगर मेरा काम-धन्धा…मेरा घरबार…
सब टूट की कगार पर है तो सिर्फ उन्हीं के कारण”
“दोराहे पे खडा आज मैँ सोच रहा हूँ कि [...]

“ये बस में नहीं है मेरे बात”

“ये बस में नहीं है मेरे बात”
***राजीव तनेजा***
मैं तेरा साथ निभा सकूं,
ये बस में नहीं है मेरे बात ।
हमारे रास्ते हैं जुदा जुदा ,
ना मैं चल सकूंगा तेरे साथ।
फिर भी दिल की ये आरज़ू है कि ,
कभी तुम को अपना बना सकें।
काश ये तमन्ना हो पूरी,
तम्हें सदके दिल के अपना सकें।
तेरे सहारे कुछ गुज़ारें वक्त [...]