“बडा दिन”
***राजीव तनेजा***
“बात पिछले साल की है….चार दिन थे अभी त्योहार आने में…
मैँ मोबाईल से दनादन ‘एस.एम.एस’किए जा रहा था”
“क्रिसमस का त्योहार जो सिर पर था लेकिन ये ‘एस.एम.एस’ मैँ..
अपने खुदगर्ज़ दोस्तों को या फिर मतलबी रिश्तेदारों को नहीं कर रहा था”
“ये तो मैँ उन रेडियो वालों को भेज रहा था जो…
‘साँवरिया’ और ‘ओम शांति [...]
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