“ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए”
***राजीव तनेजा***
“क्या मियाँ!….?”…
“अब तो दिवाली को गुज़रे हुए भी कई घंटे हो गए”…
“अब तो ये आलस-शालस को मारो गोली और सीधा बाथरूम में जा घुसो”…
“बाल्टी,साबुन.तेल,शैम्पू सब याद कर रहे हैँ”
“बाजुएँ अकड गयी हैँ उनकी तुमसे मिले बिना”
“और तुम हो कि….कोई फिक्र ना फ़ाका”..
“याद है ना…
‘शानू जी’के कवि सम्मेलन में जाना है?”और…
दो [...]
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