“बडा दिन”

“बडा दिन”
***राजीव तनेजा***
“बात पिछले साल की है….चार दिन थे अभी  त्योहार आने में…
मैँ मोबाईल से दनादन ‘एस.एम.एस’किए जा रहा था”
 
“क्रिसमस का त्योहार जो सिर पर था  लेकिन ये ‘एस.एम.एस’ मैँ..
अपने खुदगर्ज़ दोस्तों को या फिर मतलबी रिश्तेदारों को नहीं कर रहा था”
“ये तो मैँ उन रेडियो वालों को भेज रहा था जो…
‘साँवरिया’ और ‘ओम शांति [...]

“ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए”

“ठण्डे-ठण्डे पानी से नहाना चाहिए”
***राजीव तनेजा***
“क्या मियाँ!….?”…
“अब तो दिवाली को गुज़रे हुए भी कई घंटे हो गए”…
“अब तो ये आलस-शालस को मारो गोली और सीधा बाथरूम में जा घुसो”…
“बाल्टी,साबुन.तेल,शैम्पू सब याद कर रहे हैँ”
“बाजुएँ अकड गयी हैँ उनकी तुमसे मिले बिना”
“और तुम हो कि….कोई फिक्र ना फ़ाका”..
“याद है ना…
‘शानू जी’के कवि सम्मेलन में जाना है?”और…
 दो [...]

“मेरी कहानी नवभारत टाईम्स पर”

“मेरी कहानी नवभारत टाईम्स पर”22.10.2007 को नवभारत टाईम्स में मेरी कहानी छपी है

“बताएँ तुम्हे बच्चा कैसे होता है” के नाम से

www.navabharattimes.com -पाठकपन्ना-कहानियाँ - बताएँ तुम्हें बच्चा कैसे होता है
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/2480094.cms  जिसे एक ब्लॉगर बन्धु श्री पवन कुमार मल्ल जी ने जस का तस कॉपी-पेस्ट कर डाला है अपने ब्लॉग पे …
http://pawankumarmall.blogspot.com/
उनका मैँ अत्यंत आभारी हूँ [...]

“कुछ जतन करो मेरे भाई”

“कुछ जतन करो मेरे भाई”
***राजीव तनेजा***
ना रहा अब दिन को चैन
ना रही अब रातों की नींद
सुख-चैन लुट गया है मेरा 
कब-कब आओगे तुम रघुवीर
पढने वाले पढ-पढ रहे
समझ  रहा ना कोई
कुछ जतन करो मेरे भाई
कुछ  जतन करो मेरे भाई
पहले मैने  इसे  पिया 
अब ये मुझे पीने लगी
ज़िन्दगी पहले सी कहाँ
बोझिल अब  होने लगी
कुछ जतन करो मेरे भाई
कुछ जतन [...]

“मंगल-कामना”

“मंगल-कामना”
***राजीव तनेजा***

“दिपावली की शुभ मंगल-कामनाएँ आप सभी को….
“ऊप्स!…सॉरी…
‘मंगल’ सिर्फ लड्कियों के लिए और….
‘कामना’ सिर्फ लडकों के लिए”
“बिकाझ उल्टी गंगा इझ नॉट अलाउड हीयर इन मॉय ब्लॉग”
“हिन्दी हैँ हम…वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा”
“समझा करो यार”…
“वैसे भी उलटे बाँस बरेली कहाँ जाता है आजकल?”
“देसी है हम…विलायती नहीं”…
“सुनो लडकियो!…पते की बात”..
“फिर न कहना कि मौका नहीं दिया और कर [...]

“हाँ मैँ सरदार हूँ”

“हाँ मैँ सरदार हूँ”
***राजीव तनेजा***
“अब यार!…इन लडकियों को हमारा सरदार पसन्द क्यों नहीं आते हैँ भला?”
“ये बात तो आज तक अपने पल्ले नहीं पडी”
“आखिर!..क्या कमी है हम में?”
“पता नहीं उन्हें हम सरदारों के नाम से ही करैंट क्यों लगने लगता है?”
“अब यार!..इन कमबखत मारियों से लाख छुपाने की कोशिश की कि मैँ सरदार हूँ लेकिन [...]

“बधाई हो बधाई”

“बधाई हो बधाई”
***राजीव तनेजा***
“बधाई हो बधाई….आप बाप बनने वाले हो”…
“ऊप्स सॉरी!…”..
पता नहीं कैसे जब भी किसी को बधाई देनी होती है तो  इस मुँह से बस यही निकलता है मानो…
सामने वाला बाप ही बनने वाला हो”…
“और तो कोई काम हो ही नहीं सकता ना जैसे इसके अलावा बधाई के लायक?”
“अब आपको तो पता ही है [...]

“सलाम-नमस्ते”

“सलाम-नमस्ते”
***राजीव तनेजा***
“हॉय!….”..
“हैलो!….”..
“सलाम!….”..
“नमस्ते!…”…
“आदाब!….”
“इन सब में से दोस्तों!…मैँ आपको कुछ भी नहीं कहने वाला”…
“वो दर असल बात कुछ यूँ है कि अब ये अपने हिन्दी ब्लॉग तो ऊपरवाले की दया से और….
आप जैसे दोस्तों की कडी मशक्कत से दिन दूनी रात चौगुनी तेज़ी से बढते ही जा रहे हैँ और…
अपुन के ब्लॉग पे भी ट्रैफिक कुछ बढता [...]