“गधे के पीछे गधा”

“गधे के पीछे गधा”

“सरदार संता सिंह अँग्रेज़ी का माना हुआ टीचर था”

“उनके विधार्थी हमेशा अव्वल आते थे”

“एक दिन स्कूल की इंस्पैकशन थी”….

“इंस्पैक्टर  ने अँग्रेज़ी कक्षा का इम्तिहान लेने की सोची और…

वो चुपचाप क्लास के बाहर खडा होकर सुनने लगा कि…

संता सिंह क्या पढा रहा है?”
“इंस्पैक्टर बेचारा परेशान कि ये कैसी…किस तरीके की पढाई हो रही है?”

संता सिंह:”बोलो बच्चो!…’गधा’…”
सभी बच्चे:”गधा”…
संता सिंह:”बोलो बच्चो!…गधा..गधे के पीछे गधा”
सभी बच्चे:”गधा…गधे के पीछे गधा”
संता सिंह:”बोलो बच्चो!…गधा..गधे के पीछे गधा,गधे के पीछे मैँ”

सभी बच्चे:”गधा..गधे के पीछे गधा,गधे के पीछे मैँ”

संता सिंह:”बोलो बच्चो…गधा..गधे के पीछे गधा,गधे के पीछे मैँ…मेरे पीछे सारा देश”

सभी बच्चे:”गधा..गधे के पीछे गधा,गधे के पीछे मैँ…मेरे पीछे सारा देश”
“सुनकर दिमाग का दही होने लगा”…

“चक्कर खा गया कि ये पढई हो रही या मज़ाक?”…

“या!..ऐसे ही की जाती है पढाई?”

“ऐसे सैकडों सवाल उसके दिमाग में गुटरगूं करने लगे”

“जब रहा न गया तो वो गुस्से में दनदनाता हुआ सीधा…

प्रिंसिपल साहब के कमरे में जा घुसा और एक ही साँस में सारा वाक्या सुनाया”
“प्रिंसिपल साहब भी सुन कर हैरान-परेशान हो उठे”…

“उन्होने संता को नीचा दिखाने की सोची और बे-इज़्ज़ती करने के खातिर उसे तुरंत ही बुलवा लिया”

“संता के आते ही सीधा बिना रुके झाड पिलानी शुरू कर दी”…

“तुमने मज़ाक बना रखा है स्कूल का..वगैरा..वगैरा”…

संता”ऐसी कोई बात नहीं है जी”…
 
“आप गल्त सोच रहे हैँ”…

” मैँ तो बच्चों को पढा ही रहा था”…
“हुह!…ऐसे ‘गधा-गधा’कर के होती है पढाई?”

“वाह!…क्या स्टाईल हमारे ‘संता’का….वाह”
संता:”जी!…मैँ बच्चो को बस ‘ASSASSINATION’ के स्पैलिंग सिखा रहा था”
“ASS-ASS-I-NATION”
***राजीव तनेजा***

3 Responses to ““गधे के पीछे गधा””

  1. बढिया!

  2. सही है. :)

  3. हा हा हा एकदम मौलिक, मजा आ गया

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