“शाही पनीर फिर दाल मक्खनी”
***राजीव तनेजा***
“बहुत दिनों बाद एक दोस्त मिला…
आँखे सूजी हुई….
चेहरा पीला पडा हुआ….
थकान के मारे बुरा हाल…
नींद के नशे में ऐसे चूर…मानों कई बोतल एक साथ चढा रखी हों”
“मैँ चकराया कि ये बन्दा तो ऊपरवाले ने बडा ही नेक बनाया था”…
“इसे क्या हो गया?”
“खैर!..आराम से बिठाया अपने पास”…
“फिर एक ‘डबल डोज़’वाली कडक’कॉफी’बना [...]
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