“स्टिंग आप्रेशन”
***राजीव तनेजा***
“हद हो गयी इन’स्टिंग आप्रेशनों’की”..
“किसी को भी नहीं बक्शते”
“पता नहीं क्या मिलता है इनको गडे मुर्दे उखाडने से?”या फिर…
“क्या मिल जाएगा इस सब से?”
“किसी की इज़्ज़त-आबरू को कुछ समझते ही नहीं ये’मीडिया’वाले”
“इन्हें तो बस अपनी’टी.आर.पी’की पडी होती है कि…
‘कैसे भी’…
‘किसी भी जायज़-नाजायज़ तरीके से बस बढनी चाहिए”
“पता नहीं किसका हाथ है इस सब [...]
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