“दुनिया आपकी जेब में”
***राजीव तनेजा***
“हाँ!. ..हाँ!….
“जी हाँ”…
“एक रास्ता”…..
“सिर्फ’एक-इकलौता’रास्ता….
इस गलाकाट प्रतियोगिता से निबटने का”…
“जी हाँ!…”
“सिर्फ एक कदम”…
“या फिर”…
“एक सही फैसला”…और
“आप दुनिया की भीड में’सबसे अलग’…
‘सबसे जुदा’…
‘सबसे आगे’होंगे”
“मीलों आगे”…
“कोई’कम्पीटीटर’आस-पास भी नहीं फटक पाएगा
“बस एक!..’सीधा-सरल’रास्ता और….
“दुनिया आपकी मुट्ठी में”या यूँ कहें कि….
“दुनिया आपकी जेब में होगी”
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***राजीव तनेजा***
10/11/2007 at 12:49 am
अब इस जनम में तो राजू पान सेन्टर से उधार मिलने की उम्मीद न रही. दूसरी दुकान देखते हैं.
10/13/2007 at 9:52 am
सिर्फ़ एक कदम….पाँव काम नहीं कर रहे कि कदम आगे बढ़े…
लेकिन चिन्ता नहीं..
आड़े-तिरछे पाँव रखकर भी वोह एक कदम पड़ सकता है..
कमाल का लिखते हैं राजीव जी
10/31/2007 at 6:59 pm
बड़िया