“हर फिक्र को धुएँ में उडाता चला गया”
***राजीव तनेजा***
‘गान्धी जी’भी नहीं रहे….
‘सुभाष जी’भी चल बसे…
‘जवाहरलाल जी’भी कब के ऊपर पहुँच गए…
“मेरी भी तबियत कुछ ठीक नहीं रहती…
“ना जाने कब लुढक जाऊँ”
“पता नहीं इस देश का क्या होगा?”
“अब रोज़-रोज़ बिना रुके लगातार’सूटटे’मारुंगा तो तबियत तो बिगडनी ही है लेकिन…
क्या करूँ ये साला!…दिल है के मानता नहीं”
“बहुत [...]
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