Posted on September 13, 2007 by राजीव् तनेजा
“मेरे ख्यालों में”
***प्रभाकर***
(मेरे अंकल द्वारा लिखी गयी एक गज़ल)
मेरे ख्यालों को बुलन्द परवाज़ दे
एहतिरामे ज़ुबाँ हो वह अलफाज़ दे
मेरे तसव्वुर में बस उभरे तेरी तसवीर
मेरी ज़ुबाँ पे बस तू अपनी आवाज़ दे
मेरा वजूद तेरे वजूद से है कायम
मुझे अपनी रहमत से तू नवाज़ दे
तेरी जल्व:गरी का रहा मुन्तज़र”प्रभाकर”
मेरी तलाश को अब तू नवाज़ दे
तारीक-ए-जहालत में [...]
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Posted on September 13, 2007 by राजीव् तनेजा
“सांता ज़रूर आएगा”
***राजीव तनेजा***
“यूँ तो अभी भी कुछ महीने बाकि थे’बडा दिन’आने में लेकिन…
बच्चे तो बच्चे होते है….
“उनके लिए क्या आज और क्या कल?”
“स्कूल की डायरी में क्या पढ लिया कि….
तीन महीने बाद’बडे दिन’की छुट्टियाँ आने वाली हैँ,
सो ….अभी से चहकना चालू हो गया उनका कि….
“सांता क्लाज़ आएगा”….
“सांता क्लाज़ आएगा”…और…
“नए-नए तोहफे लायेगा”
“उन बेचारों को क्या [...]
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Posted on September 10, 2007 by राजीव् तनेजा
धन्यवाद चिट्ठाजगत, ….पाँच नए धमाल मचाते चिट्ठों मे शामिल करने के लिये बहुत-बहुत धन्यवाद…. उम्मीद से ज़्यादा….कभी सोचा भी ना था…
एक बार फिर से शुक्रिया आप सभी साथियों का जिनके सहयोग के बिना ये सम्भव ना था
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Posted on September 10, 2007 by राजीव् तनेजा
“दोस्त दोस्त ना रहा”
***राजीव तनेजा***
“दोस्त-दोस्त ना रहा…प्यार-प्यार ना रहा”….
“ऐ ज़िन्दगी हमें तेरा एतबार ना रहा”
“आज ये गाना मुझे बार-बार याद आ रहा था …और इस सब की वाजिब वजह भी तो मौजूद थी
“सच ही तो है…
आजकल कोई किसी का….
‘यार’नहीं,….
‘दोस्त’नही…..
‘सब के सब’मतलबी’इंसान”
“सामने कुछ और पीठ पीछे कुछ”…
“मेरी ऊट्पटांग कहाँनियों और मेल्ज़ की तो मेरे सामने जी [...]
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Posted on September 9, 2007 by राजीव् तनेजा
ज़मीर जाग उठा”
***राजीव तनेजा***
“आज बीवी बडा उछल रही थी…पूछने पर खत हवा में लहराते हुए बोली
“मामा जी का खत आया है और छुट्टियों में मुम्बई बुलाया है”
“मैँ सोच में डूब गया कि …
‘क्या करें?’….
‘जाएं के ना जाएं?’
“मन तो कर रहा था कि मना कर दूँ”…
“वजह…खर्चा बहुत हो जाएगा”
“सात-सात बच्चों को लेकर मुम्बई जैसे महँगे शाहर [...]
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Posted on September 7, 2007 by राजीव् तनेजा
“शादी का लड्डू”
***राजीव तनेजा***
दोस्तो!..सर्दियाँ चालू होने वाली हैँ….
तैयार हो जाओ…
खर्चे का मौसम जो आ गया है”
अब आप पूछेंगे कि “सर्दी से खर्चे का भला क्या कनैक्शन है ?”
“तो भैया मेरे,…बडा ही तगडा कनैक्शन है …
“अब यार पहले पूछो तो सही….
तभी तो मैँ बताऊँ या फिर यूँ ही …
‘गली-गली’जा-जा के धक्के खाते हुए मुफ्त में ही [...]
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Posted on September 6, 2007 by राजीव् तनेजा
“राम नाम सत्य”
***राजीव तनेजा***
“कई दिनों से बीवी की तबियत दुरस्त नहीं थी”….
“कई बार कहा भी कि ..डाक्टर के पास ले चलो लेकिन….
मुझे अपने काम-धन्धे से फुरसत हो तब ना”
“हर बार किसी ना किसी बहाने से टाल देता”
एक दिंन बीवी ने खूब सुनाई कि “मेरे लिये ही तो टाईम नहीं है जनाब के पास”
“वैसे पूरी दुनिया [...]
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Posted on September 2, 2007 by राजीव् तनेजा
“क्या माजरा था?”
“क्या माजरा था?”
***राजीव तनेजा***
“आज जन्मदिन है मेरा..लेकिन दिल उदास है”
“पुरानी यादें जो ताज़ा हो चली हैँ”….
“उस दिन भी तो जन्मदिन ही था मेरा”…
“जब मै अड गया था कि गिफ्ट लेना है तो बस…
‘कप्यूटर ही लेना है”…
“उसके अलावा कुछ नहीं”
“ज़िद क्यों ना करता मैँ?”…
“आखिर पास जो हो गया था मैँ लगातार ….
तीन साल फेल [...]
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Posted on September 1, 2007 by राजीव् तनेजा
“अब तक छ्प्पन”
***राजीव तनेजा***
“ये साला!…..कम्प्यूटर भी गज़ब की चीज़ है ….गज़ब की क्या?……
बिमारी है साला….बिमारी”
“एक बार इसकी लत पड गयी तो समझो कि….बन्दा गया काम से”
“कुछ होश ही नहीं रहता” …..
“ना काम-धन्धे की चिंता” …..
“ना यार-दोस्तों की यारी”
“यहाँ तक की बीवी-बच्चों के लिये भी टाईम नहीं होता” ….
“बस हर वक़्त क्म्प्यूटर ही कम्प्यूटर”
“शुरु में [...]
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