“आओ तौबा करें”
***राजीव तनेजा***
“कभी सोचा भी ना था कि ऐसा होगा”…
“इंसानियत का सरे बाज़ार’कत्लेआम’होगा”….
“हम इंसान के बजाए शैतान बनते जा रहे हैं”…
“कोई’शर्म-ओ-हया’बाकी नहीं रही अब”…
“जब इनसान ही इनसान के साथ ऐसा बर्ताव करेगा तो फिर…
उसमें और जानवर में क्या फर्क बाकी रहेगा?”…
“किसी को अगर उसके किए की सज़ा देनी भी है तो …
उसकी कोई ना [...]
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