“बिन माँगे मोती मिले”
***राजीव तनेजा***
“बात सर के ऊपर से निकले जा रही थी”….
“कुछ समझ नहीं आ रहा था कि…
“आखिर!…माजरा क्या है?”..
“जिस बीवी को मैँ फूटी आँख नहीं सुहाता था,वो ही मुझ पर मेहरबान हुए जा रही थी और…
इस सब का कोई वाजिब कारण भी तो दिखाई नहीं दे रहा था”
“जो कल तक मुझे देख’नाक-भों’सिकोडा करती [...]
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