“लेडीज़ फर्स्ट”
***राजीव तनेजा***
“आज घडी-घडी रह-रह कर दिल में ख्याल उमड रहा था कि..
“जो कुछ हुआ….क्या वो सही हुआ?”
“अगर सही नहीं हुआ तो फिर…आखिर क्यूँ नहीँ हुआ?और…
या फिर यही सही था तो फिर…
ऐसा क्यूँ हुआ?”
“आखिर’ऊपरवाले’से मेरी क्या दुशमनी थी?
“किस जन्म का बदला ले रहा था वो मुझसे?….
जो उसने मुझे’लडका’बनाया”….
“अगर लडकी बना देता तो…उसका क्या घिस जाता?”
“उसका [...]
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