“सजन रे बूट मत खोलो”

“सजन रे बूट मत खोलो”
***राजीव तनेजा***

“सजन रे’बूट’मत खोलो….अभी’बाज़ार’जाना है,
ना’दालें’हैँ ना’सब्ज़ी’है …अभी तो’राशन’लाना है”

“अरे ये क्या?”…
“ये तो मै असली गीत गुनगुनाने के बजाए उसकी’पैरोडी’ही गाने लगा”
“असली गाना तो शायद कुछ अलग तरह से था ना?”
“अरे हाँ!..याद आया,वो तो इस तरह से था…
“सजन रे’झूठ’मत बोलो,..’खुदा’के पास जाना है,
ना’हाथी’है ,ना’घोडा’है…वहाँ तो बस’पैदलजाना है”
“वाह!..वाह..क्या गाना था…वाह!”
“गुज़रा ज़माना याद आ [...]