“ज़मीर जाग उठा”

ज़मीर जाग उठा”
***राजीव तनेजा***
“आज बीवी बडा उछल रही थी…पूछने पर खत हवा में लहराते हुए बोली
“मामा जी का खत आया है और छुट्टियों में मुम्बई बुलाया है”
“मैँ सोच में डूब गया कि …
‘क्या करें?’….
‘जाएं के ना जाएं?’
“मन तो कर रहा था कि मना कर दूँ”…
“वजह…खर्चा बहुत हो जाएगा”
“सात-सात बच्चों को लेकर मुम्बई जैसे महँगे शाहर [...]