Posted on August 4, 2007 by राजीव् तनेजा
“एक डुबकी और सही”
***राजीव तनेजा***
“भाईयो और @#$%^”
“अब अपने मुँह से कैसे कहूँ?”
“अब किसी को बहन तो मै केहने वाला नहीं….अपने आप समझ जाओ ना यार….
“वैसे तो मैं आप ही तरह सीधा -साधा इंसान हूँ लेकिन….अपने इस् दिल के कारण बडा परेशान हूँ…
अपने आप ललचाता है और लोग समझते है कि ये तो इसकी आदत है [...]
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Posted on August 3, 2007 by राजीव् तनेजा
“खत प्यार भरा “
प्यारे पुतर्वाहे गुरु, मै ये चिट्ठी तुम्हे धीरे-धीरे इसलिये लिख रही हूँ क्योंकि मै जानती कि तुम तेज़-तेज़ नही पड सकते.
आजकल हम पुराने वाले घर मे नही रहते जहाँ तुम हमे छोड कर गये थे.
तुम्हारे पितजी ने अख्बार मे पडा था कि ज़्यदातर एक्सीडेण्ट घर से 20 मील की दूरी के अन्दर-अन्दर [...]
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