हँसते रहो Hanste Raho: "पूरे चौदह साल"#links

हँसते रहो Hanste Raho: “पूरे चौदह साल”#links

"पूरे चौदह साल"

“पूरे चौदह साल”
***राजीव तनेजा***
“आज वक़्त नहीं था मेरे पास”,..“इधर-उधर भागता फिर रहा था” ,…“सारे काम मुझे ही जो संभालने थे”…
“मेहमानों का जमघट लग चुका था,…“उनकी खातिर् दारी में ही फंसा हुआ था सुबह से”
“खूब रौनक-मेला लगा था”…“बच्चे उछल कूद रहे थे”…
“मैँ कभी टैंट वाले को,तो कभी हलवाई को फोन घुमाए चला जा रहा था”..
“साले [...]