"रुखसाना को नहीं छोडुंगा"

“रुखसाना को नहीं छोडुंगा”

***राजीव तनेजा***

“चाहे कुछ भी हो जाए मैँ इस रुखसाना की बच्ची,दाल-दाल कच्ची को छोडने वाल नहीं”

“दो दिन में ही तारे दिखा दिए इसने तो मुझे ,कहीं का नहीं छोडा”

बडे मज़े से मेल भेजा कि “आपकी तो इतनी लंबी मेलिंग लिस्ट है ,कैसे मैनेज करते हैम ये सब ?”

“मेरा भी एक छोटा सा ‘याहू’ग्रुप है , प्लीज़ जायन कर लें “

“मैने सोचा कि औरत ज़ात है और अपुन की तारीफ भी कर रही है …..

अब इसको क्या मना करूँ?

जहाँ इतने सही वहाँ एक और सही लेकिन ..

किंतु….

परंतु…

“मुझे क्या पता था कि ये मैम्बर बना के अपने ग्रुप की रौनक बढाने के बजाय मेरे ही जीवन में अन्धेरा कर डालेगी”

“इसने एक तो जो मेल पे मेल भेजना शुरू किया तो फिर रुकने का नाम नहीं लिया और …

मेल भी ऐसी ऐसी कि बन्दा तो बस अपनी माशूका की तारीफों में ही पूरा जीवन गुज़ार दे”…

“पता नहीं दुनिया भर की शायरी कहाँ से बटोर लाती थी ?”

“हमें जैसे कोई काम ही नहीं है ना दुनिया में?बस उसी की ये नासपीटी शायरी ही पढते रहें “

“बच्चे कौन पालेगा?”

“इन मेल्ज़ को पढने के चक्कर में जो काम बचे रह गये हैँ ,उनको शायद ये मोहतरमा …..

सीधे क्ज़ाकिस्तान से दिल्ली की फ्लाईट पकड कर आएंगी और पूरा करेंगी(वहीं रहती है ना वो)”

“आ जाए अगर कसम से तो एयरपोर्ट पर ही गिन-गिन के बदले ले लूं”

“मेरी ज़िन्दगी जो कभी जन्नत से कम नहीं थी ,इस मुई का ग्रुप जायन करते ही नर्क से भी बद्तर हो गयी”

“बेडा गर्क कर के रख दिया”

अब आप पूछेंगे कि “इसमें उस बेचारी रुखसाना का क्या कसूर?”

“और लो!…. पूछ रहे हैँ कि क्या कसूर?”

“अरे मेरी इक्लौती बीवी ने गल्ती से उसकी एक मेल जो पढ ली,…

“पड गयी हाथ धो के मेरे पीछे कि अब मैँ उसकी तारीफ में कोई….

‘गज़ल’,….

‘शेर’…. या फिर कोई ….

‘डायलाग’ ही बोल दूँ”

“अब यार क्या बताऊँ कि इन सब मामलों में अपुन पूरे के पूरे फिसड्डी हैँ और बीवी थी कि वहीं के वहीं अटक के खडी हो

गयी”

“एक ना सुनी”,बोली कि “आज से चाय-नाश्ता सब बन्द”

“क्या करता मैँ बेचारा?कुछ तो बोलना ही पडा और गल्ती से कहो कि मैँ उसको उसी के ऊपर एक ‘चुटकला’ सुना बैठा”

“बस चुटकला सुनना था और उसका भडकना था, तपाक से बोली …

“मैँ तो चली मायके,अब उसी कलमुँही ‘रुखसाना’ को ही बुला लो रोटियाँ सेंकने”

“उसको मनाने की कोशिश कर ही रहा था कि तभी उस’रुखसाना’की बच्ची ने बीवी के जलते हुए सीने पर धडाक से एक

और मेल दाग दी”

“पता नही किस जन्म का बदला ले रही थी”

“बीवी का पारा सातवें आसमान तक जा पहुँचा और गुस्से में ‘मोगैम्बो’ की तरह फुफकारते हुए बोली …

“अभी कम्प्यूटर उठा के पटक दूँगी ,फिर करते रहने मज़े इस ‘रुखसाना’ की बच्ची से “

लाख मनाया पर न मानी,काफी जी-हजूरी करने के बाद बोली…

“पहले मेल तो खोलो,देखूँ तो सही कि क्या ऊट-पटांग भेजती रहती है ये मुसटंडी आपको?”

“मैने डरते-डरते मेल खोली कि पता नहीं इस बार क्या निकल आए और मेरी आफत खदी हो जाए “

“लेकिन मेल खुलते ही बीवी का चेहरा खिल उठा,”

“बांछे खिल उठी”

“ये रुखसाना तो बहुत अच्ची है”

“मैँ तो नाहक ही गरम हुए जा रही थी”

“आप भी तो समझा सकते थे ना मुझे ?”

“आप एक काम करो इसे ही ले आओ”

“किसको?”

“रुखसाना को ?”

“मेरे तो करम ही फूट गये जो इस बावले संग ब्याह रचाया,किस्मत ही फूटी थी मेरी “

“अरे बेवाकूफ आँखे हैँ कि बटन?दिखाई भी नहीं देता कि क्या भेजा है मेरी बहन ने ?”

“बहन? यहाँ तो रिश्तेदारी तक बात पहँचने वाली है

झट से मेल देखा तो मेरे होश उड गये,

माथा पकड के बैठ गया,

दिमाग सुन्न हुए जा रहा था

“कम्भखत मारी ने मेरी वाट लगाने की पूरी तैयारी से मेल भेजी थी”

“ऐसी-ऐसी फोटू देखी कि सर चकराने लगा

बीवी बोली चलो “अभी के अभी”

कोई चारा भी तो ना था ,हाँ में हाँ मिलानी पडी

ना मन होते हुए भी वो सब करना पडा जिससे मैँ कतराया करता था

पूरे बीस हज़ार का फटका लगा तभी बिगडी बात बनी,बीवी मायके जाने को जो तैयार बैठी थी वरना मैँ और नोट खर्चा?

“बाप रे बाप”

कम्भखत मारी रुखसाना ने मेल में ऐसी ऐसी मँहगी ‘बनारसी साडियों’ के फोटू भेजे कि बीवी से रहा नहीं गया और..

ज़िद पे अड बैठी कि लेनी है तो बस यही वाली लेनी है

4 Responses to “"रुखसाना को नहीं छोडुंगा"”

  1. अब आगे किसी रुखसाना से बच कर रहना , यही सबक बहुत है !!!!

  2. जी अब तो ख्याल रखना ही पडेगा, वैसे भी मँह्गाई का ज़माना है

  3. गनीमत है सस्ते मे छूट गए । :)

  4. Kambakht Rukhsana ne apako le dala /
    kaisi kaisi balayen hain ye bala //

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