"जन्तर मन्तर काली कलन्तर"

“जन्तर मन्तर काली कलन्तर”
बडे दिन हो गए थे खाली बैठे बैठे,कोई काम-धाम तो था नहीं बसकभी-कभार कमप्यूटर खोला और थोडी बहुत ‘चैट-वैट’ ही कर ली।सच पूछो तो यार ‘बेरोज़गार’था मैं और इसमेंअपनी सरकार का कोई दोष नहीं,दरअसल अपनी पूरी’जैनरेशन”ही ऐसी है।
अब कोई छोटी- मोटी नोकरी तो हम करने से रहे ।
अब यार हर किसी ऐरे-गैरे [...]

“जन्तर-मन्तर काली कलन्तर”

“जन्तर-मन्तर काली कलन्तर”
***राजीव तनेजा***
बडे दिन हो गए थे खाली बैठे बैठे,कोई काम-धाम तो था नहीं बस
कभी-कभार कमप्यूटर खोला और थोडी बहुत ‘चैट-वैट’ ही कर ली।
सच पूछो तो यार ‘बेरोज़गार’था मैं और इसमें
अपनी सरकार का कोई दोष नहीं,दरअसल अपनी पूरी’जैनरेशन”ही ऐसी है।
अब कोई छोटी- मोटी नोकरी तो हम करने से रहे ।
अब यार हर किसी ऐरे-गैरे  [...]