"डंडा किसका है?"


चिट्ठाजगत अधिकृत कड़ी

“डंडा किसका है?”

***राजीव तनेजा***

एक बार एक सरदार जी को किसी आदमी ने ताना मारा
“ओ सरदार जी ,आपकी तो हिन्दोस्तान मैं कोई कदर ही नहीं है “.

सरदार:”ओये, क्या बकवास कर रहा है?”

आदमी:”नहीं जी मैं सच कह रहा हूँ , आपकी तो इस देश मैं कोई कदर ही नहीं है.”

सरदार:”ओये हुन्न तू फालतू बोला ना , तो मैं तेरा मुह तोड़ दूँगा.”

आदमी;”ओ जी मैं साबित कर सकता हूँ.. जी.’
सरदार:’ओये…फिर कर के तो दिखा.”

आदमी:”सरदार जी ,हिंदुस्तान के झंडे मैं तीन रंग होते हैं ना ?”
सरदार;’हाँ होते हैं… फिर?”

आदमी:”कौन…कौन से होते हैं जी?”
सरदार;”ओये…”संतरी”, “सफ़ेद” और “हरा”…फिर?”

आदमी:”संतरी” रंग तो हिंदूओ का हो गया.”
सरदार:”फिर?”

आदमी:”सफेद…रंग..तो..जैन..धर्म वालो का हो गया “
सरदार:”ओये..फिर मैं क्या करूँ?”

आदमी:”सरदार जी पेहले पूरी बात तो सुन लो.”
सरदार:”चंगा .. हुन्न बोल फटाफट.”

आदमी:”और ये जो हरा रंग है ,वो तो मुस्लिम भाइयों का हो गया.”
सरदार:”ओये फिर मैं की कराँ ?”

आदमी:”इस झंडे मैं तो आप सरदारों का तो कुछ भी नहीं है.”
सरदार:”ओये ये डंडा तेरे प्यो(बाप)दा है?”

One Response to “"डंडा किसका है?"”

  1. बहुत हंसाते हो भाई.

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